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Eternal Learner

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छठ पूजा मेरे जीवन का ऐसा फेवरेट मूवमेंट है जो पिछले39 साल मे प्रति वर्ष आता है ।वो चार दिन मुझे अपना घर किसी महल से कम नहीं लगता है।परिवार के सारे सदस्य जुटते हैं तो कुल संख्या तीस पैंतीस की हो जाती है।उसके लिये एक दिन पहले से लेकर दो दिन बाद तक के लिये एक बाबर्ची एक सहयोगी अलग से रखा जाता है और रेगुलर स्टाफ में एक मेड और एक ड्राइवर तो रहता ही है।पूजा का प्रारंभ कद्दू भात से होता है पर उससे एक दिन पहले से पूरे घर की सफाई सारे चादर मसहरी तकिया खोल धोना से लेकर तोशक गद्दा सबको सुखाना होता है।फिर बॉक्स रूम से पूजा के सारे बर्तन निकलवा कर धुलवाना।ये ऐसे बर्तन हैं जो सारे पीतल और कांसा के हैं और साल में एक बार निकलते हैं फिर पूजा के बाद वहीं रख दिये जाते हैं।कद्दू भात के दिन सुबह से नाइन का इंतजार होता कि वो आकर हमारे नाखून काट कर पैर में रंग लगा दे।उसके बाद हमारा गंगा स्नान का कार्यक्रम बनता ।हम चार लोग मिलकर पूजा करते हैं मैं मेरी दो देवरानी एक बहन ।फिर परिवार के अन्य लोग भी गंगा स्नान केलिये चलते तो तीन गाडियां निकलती और स्नान कर हमलोग करीब तीन बजे लौटते हैं।उस समय तक जो घर में रहते हैं वो सफाई करके पवित्रता से भोजन बनाना प्रारंभ कर देते हैं ।उस दिन का एक नियम होता है कि बिनासूर्य भगवान को भोग लगाये कोई भोजन जूठा नही कर सकता है इसीलिये बाकी लोगों के लिये चूडा दही ,ब्रेड बटर ,मूढी ,दालमोठ की व्यवस्था की जाती है।

भोजन जो बनता है उसकी सामग्री उसी दिन खरीद कर मंगाई जाती है ।दाल चावल सब्जी कद्दू गोबी पालक की पकौडी सब शुद्ध घी और सेंधा नमक में बनता फिर चार पांच बजे तक हमलोग पूजा करके प्रसाद पाते हैं ।उस रात फिर वही खा लिया जाता है। दूसरे दिन सुबह से स्नान करके खीर रसिया और दोस्ती पूडी की तैयारी होती ।करीब पन्द्रह किलो दूध आता जिससे बारह किलो का खीर बनता तीन किलो अर्गासन के लिये रखा जाता है ।उस दिन व्रती लोग शाम तक अखंड उपवास करते फिर शाम की पूजा के बाद वही खीर पूडी का प्रसाद पा लेते हैं। इस प्रसाद को पाने के लिये मुहल्ले के लोगों को बुलाया जाता है करीब सौ डेढ सौ प्लेट प्रसाद बांटा जाता है काफी चहल पहल होती है पूरा बडा समारोह जैसा लगता है।उस दिन हमलोग नये कपडे लहठी पहनते हैं।तीसरे दिन पूरा अखंड उपवास होता है और तैयारी होती है मुख्य पूजा की ।हमारे यहां घर बाहर मिलाकर पचास सूप हो ही जाता है उसमें डालने केलिये नारियल टाभानींबू आवला सेव अमरूद ऑरेंज केला कवरंगा काजू किशमिश छुहारा लौंग इलायची

पान सुपारी बद्धि सिन्दूर से लेकर कच्ची हल्दी अदरक वगैरह पहले से मंगवा लिया जाता है फिर उस दिन सुबह से ठेकुआ कसार बनाने में हम लोग लग जाते हैं ।करीब दो बजे तक वहां से दो जन उठ कर सूप फल धोने का काम करते हैं ये काम बच्चों से भी करवाया जाता है शर्त ये रहती है कि वे भोजन के बाद स्नान करलें ।पहले तो हमलोग डाला लेकर गंगा जी जाते थे पर अब छत पर बने हौज में ही पानी भर कर अर्ध देते हैं।

उस दिन शाम को डूबते सूर्य को अर्घ देकर हम लोग आराम करते हैं ।सुबह चार बजे से ही उठकर घर में झाडू पोछा करवा के स्नान किया जाता है रात वाले कपडे को ही पहन कर फिर पूजा करते हैं।आज उगते हुए सूर्य की पूजा होती है।सूप मेंसे कल वाले ठेकुआ कसार को हटा कर दूसरा रखा जाता है ।आज पूजा के बाद करीब छत्तीस घंटे बाद व्रती लोग पानी पीते हैं ।इसको पारण करना कहते हैं ।इसके लिये बाबर्ची और दूसरे परिजन पारण की तैयारी करते हैं पहले नींबू पानी का शरबत फिर मूढी घुघनी छोला पकौडी पापड चाय सब बहुतायत में बनाया जाता है जितने लोग प्रसाद लेने आते हैं उनको भी खिलाया जाता है।बडों से लेकर बच्चों तक इस पूजा का इंत जार रहता है ।मेरा सबसे बडा नाती सुयश तो उसी दिन पूछने लगता है कि अगले वर्ष ये छठ कब होगा नानी ?मैं उत्सव मनाना पसन्द करती हूं ।समारोह का आयोजन करना सबके साथ मिल जुल कर रहना खाना पीना बहुत ज्यादा पसन्द है ।

आज तक तो ये मूवमेंट साल में एक बार आता रहा है जिसका मुझे बेसब्री से इंतजार रहता है ।आगे सूर्य भगवान की मरजी।

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टिप्पणियाँ

One response to “”

  1.  अवतार
    अनाम

    मूवमेंट को मोमेंट पढा जाय।

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