घमंड फितूर है दिमाग का
पद ,प्रतिष्ठा ,धन का होता
आदमी को अंधा कर देता
क्रोध ,तैश से भर जाता ।
घमंड से महाभारत हुआथा
इसी से रावण मरा था
जब भी जिसने इसे अपनाया
उसने अपना ही नाश करवाया।
भाई -भाई में क्लेश करवाता
आंगन में दीवार दिलवाता
पतन के गर्त में गिरने के बाद
सब लुट जाता तो होश में आता।
यह एक कुत्सित भाव है
अनजाने ही आ जाता है
सात्विक भाव दब जाते हैं
क्रोध से उबलने लगता है।
इसके मारे बात न करते
लोगों का दिल दुखाते रहते
सुपीरीयोरिटी से भरभर कर
सबको पांव की जूती समझते।
जैसे जैसे ऐश्वर्य बढता
वैसे वैसे घमंड भी बढता
शान्ति देने वाले भाव सब
धीरे धीरे तिरोहित हो जाता।
पहचानता नहीं इसी में चूर रहता
सम्मान पाते सब भूल जाता
हम क्यों कम रहें किसी से
सोच सोच गुब्बारे सा फूलता।
दूसरे को दुखी बनाता
बात -बात पर अपमानित करता
अन्तर्मन चीत्कार करने लगता
बदले की भावना से भर जाता।
घमंड बर्बाद कर देता
क्रोध ,अहंकार,प्रदर्शन बढाता
सरल सहज जीवन नष्ट कर
पूर्ण रूपेण धूल में मिला देता ।
विद्या
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